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आरएसएस पर प्रतिबंध की बात पर बृजमोहन अग्रवाल का कांग्रेस अध्यक्ष को करारा जवाब

रायपुर हिन्दू टाइम्स•••••

। लोकसभा सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे  द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “आरएसएस ऐसा संगठन है जो देश की आज़ादी से पहले से समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों में जुटा है। इस पर प्रतिबंध लगाने की बात करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि देश की संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और जनसेवा की भावना का अपमान है।”

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि “कांग्रेस का यह रवैया बताता है कि वह आज भी भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारधारा से डरती है। जब-जब कांग्रेस ने संघ को रोकने की कोशिश की, तब-तब जनता ने उसे जवाब दिया। आरएसएस वह शक्ति है जो राष्ट्र की आत्मा में बसती है। देश की आज़ादी से पहले से यह संगठन भारत माता की सेवा में समर्पित रहा है और आज भी सेवा, शिक्षा, संस्कार और स्वाभिमान के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।” उन्होंने कहा कि “आज बिहार ही नहीं, पूरे देश में जनता एनडीए सरकार के साथ ही मजबूती के साथ खड़ी हैं.

 

यह वही जनता है जो संघ के आदर्शों को समझती है और उसके देशहित में किए गए कार्यों का सम्मान करती है। आज तक कोई आरएसएस पर प्रतिबंध नहीं लगा सका और न ही कोई कभी लगा पाएगा। कांग्रेस चाहे जितने राजनीतिक बयान दे, संघ की लोकप्रियता और विश्वसनीयता को कमजोर नहीं कर सकती।” भाजपा सांसद ने आगे कहा कि “आरएसएस वह संगठन है जिसने बिना किसी सरकारी सहायता या राजनीतिक स्वार्थ के राष्ट्रहित में कार्य किया है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो या सामाजिक असमानता, संघ के स्वयंसेवक हर संकट की घड़ी में जनता के बीच खड़े रहते हैं। ऐसे संगठन पर प्रतिबंध लगाने की बात करना लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ है।” बृजमोहन अग्रवाल ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान को कांग्रेस की “राजनीतिक हताशा” बताया। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस अब वैचारिक रूप से दिवालिया हो चुकी है। जिस आरएसएस ने लाखों युवाओं को देश सेवा के लिए प्रेरित किया, उसी पर हमला करना बताता है कि कांग्रेस के पास आज न तो कोई दृष्टि बची है और न ही नेतृत्व का दम।” उन्होंने जनता से अपील की कि “देशविरोधी विचारों और संस्थाओं पर सवाल उठाने वालों से सावधान रहें। कांग्रेस का इतिहास रहा है कि जब-जब वह सत्ता से दूर होती है, तब-तब वह समाज को बांटने और राष्ट्रवादी संगठनों को बदनाम करने का प्रयास करती है।”

Anil Mishra

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